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Samrat Choudhary Statement: दीपक प्रकाश मंत्री पद पर बने रहेंगे, शराबबंदी और अतिक्रमण पर मुख्यमंत्री का बड़ा बयान

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बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। अतिक्रमण हटाओ अभियान, शराबबंदी और राबड़ी आवास विवाद पर भी मुख्यमंत्री ने बड़ा बयान दिया।

पटना/आलम की खबर:बिहार की राजनीति में मंत्री पद और सरकार के फैसलों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कई मुद्दों पर अपनी सरकार का रुख स्पष्ट कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि रालोमो कोटे से मंत्री बनाए गए दीपक प्रकाश को पद पर बने रहने में कोई संवैधानिक परेशानी नहीं है, भले ही फिलहाल वह विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। उन्होंने अपने उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि वह खुद भी बिना किसी सदन के सदस्य रहते हुए मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि संविधान में मंत्री बनने के बाद किसी व्यक्ति के लिए एक निश्चित समय सीमा के भीतर सदन का सदस्य बनना जरूरी होता है, लेकिन शुरुआत में सदस्य नहीं होना कोई असंवैधानिक स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि दीपक प्रकाश को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का फैसला नियमों के अनुसार है और इस पर किसी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए।

दीपक प्रकाश को सात मई को मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। वर्तमान में वह किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। इससे पहले भी वह मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसी मुद्दे पर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने अपनी स्थिति साफ की।

अतिक्रमण हटाने को लेकर सरकार का सख्त रुख

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर भी सरकार की नीति स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। चाहे निर्माण बड़ा हो या छोटा, नियमों के खिलाफ किए गए कब्जे पर कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में सरकार किसी के साथ भेदभाव नहीं कर रही है। सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी व्यक्ति की पहचान या स्थिति देखकर फैसला नहीं लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। गांवों में जमीन, आबादी और स्थानीय जरूरतों की स्थिति अलग होती है, इसलिए वहां के लिए अलग रणनीति तैयार की जा रही है।

उन्होंने संकेत दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने के लिए सरकार एक अलग नीति बनाने पर काम कर रही है, ताकि कार्रवाई के दौरान स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखा जा सके।

शराबबंदी खत्म करने के सवाल पर दो टूक जवाब

बिहार में शराबबंदी को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस चलती रही है। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर भी सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि शराबबंदी नीति को समाप्त करने का कोई सवाल ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि शराबबंदी को लेकर सरकार की नीति पहले की तरह जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोनों शराबबंदी के समर्थक रहे हैं, इसलिए इसे वापस लेने का कोई विचार नहीं है।

सम्राट चौधरी ने कहा कि शराबबंदी के कारण होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई अन्य माध्यमों से की जा रही है। उन्होंने बताया कि जीएसटी और केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि सहित अन्य आर्थिक स्रोतों के जरिए राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है।

लालू यादव और राबड़ी आवास विवाद पर भी बोले मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव बिहार के बड़े नेता हैं और उनका सम्मान किया जाता है।

उन्होंने उन आरोपों को गलत बताया जिनमें कहा जा रहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का सरकारी आवास खाली कराने की कार्रवाई किसी राजनीतिक कारण से की जा रही है।

सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकारी आवास किसी भी व्यक्ति की स्थायी संपत्ति नहीं होता। जो भी व्यक्ति मुख्यमंत्री या मंत्री पद पर रहता है, उसे पद खत्म होने के बाद सरकारी नियमों का पालन करना होता है।

उन्होंने कहा कि आज कोई मुख्यमंत्री है, तो भविष्य में कोई दूसरा व्यक्ति उस पद पर आएगा। इसलिए सरकारी आवास को स्थायी अधिकार की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

सरकार के फैसलों पर मुख्यमंत्री ने रखी स्पष्ट नीति

मुख्यमंत्री के इन बयानों से साफ है कि राज्य सरकार अपने फैसलों को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत दे रही है। मंत्री पद को लेकर उठ रहे सवालों से लेकर अतिक्रमण और शराबबंदी जैसे मुद्दों पर सरकार ने अपनी नीति स्पष्ट करने की कोशिश की है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, आने वाले समय में बिहार में कई मुद्दे राजनीतिक चर्चा का केंद्र बने रहेंगे। ऐसे में मुख्यमंत्री के बयान सरकार की प्राथमिकताओं और रणनीति को भी दर्शाते हैं।

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